शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2019

My Home In My Village - KOYALA


मेरी बचपन की यादों का तालाब

**झुमरी तल्लैया**
हमारे पूर्वजों के अंतिम पडा़व स्थल के पास स्थित हमारे गाँव का यह तालाब,जिसके किनारे हमारे प्रिय,पूर्वज चिरनिद्रा में लीन है..आज यह तालाब अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है।विकास और संरक्षण के नाम पर इसके तीन तरफ पक्की दीवार का निर्माण कार्य किया गया है।इसके किनारों पर हमारे पूर्वजों की स्मृति में बनाऐं गये स्मृति स्थल नजर आते है।

#मेरी_कहानी_मेरी_जुबानी:-

मैं आपका बचपन का सुख सागर ढिण्ड़ बोल रहा हूँ.. भूल गए क्या आप मुझे ??आज भले ही आप भूल गए हो लेकिन मैं कैसे भूल सकता हूँ! हाँ मैं वही ढिण्ड बोल रहा हूँ जो हमेशा आपके पूर्वजों को शीतलता प्रदान करता रहा, आपके नौनिहालों को अपने आँचल में जगह देकर तैरना सिखाया,पशु-पक्षियों के प्यास से सूखे कंठो को तरबतर किया।प्रात:काल नित्य कर्मों के लिए आने वालों की सुबह की वेला में हमेशा सफेद कमल के फूलों के साथ स्वागतातुर रहा।आपके गाँव और आस पास के क्षेत्र का हमेशा जलस्तर बढाये रखा....और तो और दाह संस्कार के बाद मैं स्वंय अपवित्र होकर आप सबको पवित्र करता रहा..... खैर आधुनिकता की इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी में आप सब लोगों ने मुझें विसरा दिया...और में अपनों से धोखा खाये हुऐ खून के आँसू पी रहा हूँ.....मेरे भराव के मार्ग मानवीय हस्तक्षेप/विकास की वजह से लगभग अवरूद्ध हो चुके है।मेरा आँचल अमृतमयी जल के लिए तरस रहा है।मेरी इस भावनात्मक वेदना पर आपको अगर जरा सा भी तरस आये तो आप मेरे जलभराव के मार्ग को सुगम बनाने का कष्ट करें ताकि मैं एक बार फिर से शीतल जल से लकदक होकर सफेद कमल के फूलों से श्रृंगार कर आपकी और राहगीरों की आँखों का तारा बन सकूँ।राह चलते राहगीर रूककर मेरे शीतल जल में स्नान कर मेरे आँचल को दो घडी़ निहार सके।आपके पशुओं की प्यास बुझा सकूँ...भूमिगत जलस्तर बढा़ने मे सहयोग कर सकूँ...और आपके दिवंगत प्रियजनों को मेरे आँचल से स्पर्श करते हुए पुरवईयाँ पवन के ठण्डे झौंको से हमेशा शीतलता प्रदान करता रहूँ।मुझे उम्मीद है कि आप मुझे मेरा पूर्ववत स्वरूप प्रदान करने की दिशा में मिलकर कदम उठायेंगे।इन्ही उम्मीदों के साथ.........
तुम्हारा..उपेक्षा का शिकार..😢तालाब
#ढिण्ड

सतीश कुमार मीना
ग्राम पोस्ट-कोयला,तहसील-बामनवास
जिला-सवाई माधोपुर (राज.)
322201